हम सभी लेखक व् कवि एक जैसा ही सोचतें हैं ....जैसे कि कल हमारी एक वरिष्ठ कथाकार ने कहा कि ...........प्यारी स्वीट एंजिल जी ,
"आप मेरे मन की बात बिलकुल वैसे ही व्यक्त कर गयीं ........................... .. जो मैं अपनी कलम से नहीं कह पाई ..................बस मन में ही बुनती रह गयी.................शुक्रिया
अच्छे कवि की यही पहचान है.................कि हर पाठक को लगे कि जैसे उसका ही मन पढ़ लिया और उकेर दिया पृष्ठ प़र "
"आप मेरे मन की बात बिलकुल वैसे ही व्यक्त कर गयीं ...........................
अच्छे कवि की यही पहचान है.................कि हर पाठक को लगे कि जैसे उसका ही मन पढ़ लिया और उकेर दिया पृष्ठ प़र "
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