Sunday, June 10, 2012

दशहरा पर्व है आज ....dr.sweet angel

सीता हूँ मैं आज की नारी 
राम तुम भी तो बन जाओ 
हर एक नारी में है सीता 
प़र राम कहाँ से मैं पाऊं ?
मन में हूंक उठती है ये 
जब शूपणखों की जुल्फों 
से राम के नयन उलझतें हैं 
पैसा ,समय,प्यार लुटाते
बहुत खुश वो  नज़र आतें हैं 
पतिव्रता सीता के आंसू 
इंतज़ार में बह-बह जातें हैं 
घर  ,बच्चे ,पति की सेवा 
यही धर्म मैं निभातीं हूँ 
राम अब तो लौट आओ 
बुझते दिए की लौ मैं जलाती हूँ 

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